अमेरिका में दंगें 2020

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⭕भाग एक

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एक आदमी ने 20 के नकली नोट से सिगरेट्स खरीदीं, दुकानकार को जैसे ही पता चला उसने पुलिस को ख़बर कर दी। पुलिस आई और जिसने सिगरेट खरीदीं थीं उसे अरेस्ट करने के लिए उसकी पीठ पीछे हाथ करके हथकड़ी लगाई और क्योंकि आदमी बहुत तगड़ा था इसलिए उसको पेट के बल गिराकर उसकी गर्दन पर घुटना रख दिया। वो 46 वर्षीय आदमी एक मिनट से भी पहले बोला कि “मैं सांस नहीं ले पा रहा हूँ” पर पुलिस वाले ने कान से मक्खी उड़ाई।

क़रीब तीन मिनट बाद उस आदमी की चेतना लुप्त हो गयी और जब पुलिस की दूसरी गाड़ी का दस्ता आया, कोई आठ मिनट बाद; तबतक वो आदमी दम घुटने से मर गया।

यहाँ सरासर पुलिस की ज़्यादती नज़र आ रही है न? ये जान लग रहा है न कि उस एक पुलिस वाले पर कड़ी कार्यवाही होनी चाहिए? बिलकुल, मुझे भी लग रहा है और हुई भी लेकिन ये घटना यहाँ की नहीं, मिनेपोलिस शहर की है जहाँ नकली नोट चलाने वाला जॉर्ज फ्लॉयड अफ्रीकन-अमेरिकन था। ऑफिसर डेरेक को मर्डर चार्ज और नरसंहार के केस में अन्दर कर दिया गया। उनके साथी तीन ऑफिसर भी अन्दर हो गये पर मामला यहीं तक सीमित न रहा। लोग हैशटैग #blackLivesMatter का प्लेकार्ड बनाकर सड़कों पर उतर आये। ट्विटर-फेसबुक पर ढूंढ-ढूंढ के वो विडियो पोस्ट करने लगे जिसमें blacks को अरेस्ट करते वक़्त सख्ती दिखाई गयी।

सड़कों पर प्रोटेस्ट में ज़मीन पर लेटकर जॉर्ज की तरह #Ican’tBreathe कहकर चिल्लाने लगे। इतने से दिल नहीं भरा तो दंगे कर दिए। एडिडास/नाइकी सरीखे शो-रूम लूट लिए। अभी भी लूट रहे हैं। मिनेपोलिस के अलावा न्यू यॉर्क, डेनवर वगरह में भी ख़ूब आगजनी हो रही है। (कमेंट्स देखें)

यहाँ तक ख़बर थी, अब मैं ये भी बताता हूँ कि इसके अलावा क्या-क्या होता है। एक व्यसक जब अपने एरिया में अपने झुंड के साथ किसी अजनबी को आता देख ले तो फट से चक्कू निकाल उसे लूट लेता है, खुद मेरे दोस्त के साथ न्यूयॉर्क में ये घटना हुई थी। जब इन्हीं युवाशक्ति को पैसे की ज़रुरत पड़ती है ये आसपास के स्टोर पर बढ़िया सेवेन-राउंड-फायर-पिस्टल दिखाकर काउंटर लूट लेते है। कभी कोई चूं-पटक करे तो बिना सोचे कोकीन के नशे में उसे शूट कर देते हैं पर उस वक़्त मरने वाला बिचारा ‘वाइट’ नहीं होता, बदकिस्मत होता है और लूटने वाला ‘ब्लैक’ नहीं होता, भटका हुआ नौजवान होता है जिसे निकम्मी सरकार की वजह से बिना पढ़े नौकरी नहीं मिलती, जिसके डिप्रेशन से बचने के लिए बिचारे को ड्रग्स चाटना पड़ता है और क्योंकि सरकार इतनी निकम्मी है कि ड्रग्स फ्री भी नहीं देती, इसलिए उस महंगे ड्रग्स को ख़रीदने के लिए उसे डकैती करनी पड़ती है। वहीँ दूसरी तरफ पूंजीवादी शॉपकीपर तो था ही मरने के क़ाबिल क्योंकि उसके पास तो पैसा था न, 12 घंटे क्यों शॉप खोल के इतना कमा रहा था? उसे ग़रीबों(?) के ड्रग्स की ज़रा भी फ़िक्र नहीं थी? क्यों उसने प्रोटेस्ट किया? पैसे ही तो थे, दे देता।

ये सारा व्यंग्य सिर्फ यूएस के लिए ही नहीं है, कुछ यहाँ के लोगों को भी अपने ऊपर लेना चाहिए और आहत होना चाहिए। क्यों अख़लाक़ की मौत तो समस्त मुस्लिमों पर हमला हो जाता है पर साधूओं की मौत ग़लतफ़हमी का शिकार कहलाती है। लब्बोलुआब ये सिद्ध होता है कि डेमोक्रेसी में मिजोरिटी होने का मतलब ही अत्याचारी कहलाना होता है और माइनॉरिटी का मतलब ‘बेचारा मजबूर’ होना बन जाता है।

मेरा कहना है कि न अख़लाक़ की मौत को मुस्लिम विरोधी मानों न साधुओं की मौत को हिंदुत्व पर हमला, हमला इसे समाज पर मानों, न्याय के लिए प्रोटेस्ट करो सिर्फ ‘ब्लैक’ के लिए नहीं। हर एक मर्डर को उतना ही गंभीर लेने लगो तो किसी जॉर्ज फ्लॉयड के मरने की ख़बर ही न आए। पर नहीं, जब किसी स्पेनिश/मक्सिकन या वाइट अमेरिकन अपराधी को यही पुलिस पकड़ती है और सरेराह मारते हुए ले जाती है तो उसे “वाह क्या पॉवरफुल पुलिस है” का तमगा दिया जाता है। आप क्राइम को क्राइम की नज़र से नहीं देखते इसलिए क्राइम ग्राफ भी बढ़ता है और आपसी बैर भी फैलता है। ख़बर आते आप ढूँढने लगते हो “अरे, कोई मुस्लिम, कोई दलित, कोई महिला तो नहीं है? अरे नहीं! एक जनरल आदमी है, ये मर गया कोई नहीं, ये तो बहुत हैं पर बाकी सब विलुप्त होती प्रजातियां हैं।

वाकई समाज की फ़िक्र है तो कभी उसके लिए प्रोटेस्ट करो जो शायद उच्च कुल का था पर भूख से मर गया। उस बच्चे के लिए प्रोटेस्ट करो जिसके 99% मार्क्स आए पर उसे अपने शहर में एडमिशन न मिल सका क्योंकि उसके पास कोटा नहीं था। ज़रा उस वाइट के लिए भी आवाज़ उठाओ जिसकी आख़िरी पूँजी राह चलते लूट ली गयी और उसने आत्महत्या कर ली (सच्ची घटना NY की)। ज़रा सा दर्द उस नौजवान के लिए भी दिखा दो जिसने एड़ियाँ रगड़ लीं, पढ़-पढ़ के आँखें फोड़ लीं पर सरकारी नौकरी उसको मिली जिसकी उससे आधी काबिलियत और नंबर थे। अगर वाकई समाज की फ़िक्र है न प्यारे तो ‘क्राइम’ को लेकर बोलो ‘कलर’ को लेकर नहीं, निम्न वर्ग की फ़िक्र करो निम्न जाति की नहीं, क्योंकि यही जात-पात रंग-भेद का आरक्षण वजह है जो सैकड़ों सालों की क्रांतियों के बावजूद आज भी मन से बैर नहीं निकाल रहा है।

इस तरह का सेलेक्टिव प्रोटेस्ट इस बैर को और बढ़ा रहा है। यही टूटी दुकानें लुटे शो-रूम हैं जो ट्रंप जैसी सरकार को फिर सत्ता में लाने और प्रोटेस्टर की ख़ाल में लुटेरों को ‘सबक’ सिखाने का निमंत्रण दे रहे हैं

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⭕भाग दो⭕

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बराक हुसैन ओबामा 8 साल तक अमेरिका के राष्ट्रपति थे उस दौरान लास एंजलिस में तीन घटनाएं सामने आई थी जिसमें श्वेत पुलिस वालों ने अश्वेत को मारा था जिससे उनकी मौत हो गई थी और उस घटना के वीडियो भी सामने आए थे

मियामी में भी एक घटना सामने आई थी और बोस्टन में भी सामने आई थी

लेकिन तब अमेरिका में दंगे नहीं भड़के

लेकिन आज अमेरिका में जो दंगे भड़क रहे हैं वह दरअसल वामपंथियों को यह हजम नहीं हो रहा है एक धुर दक्षिणपंथी राष्ट्रवादी व्यक्ति राष्ट्रपति क्यों बन गया है ट्रंप जिस तरह से खुलकर कट्टर इस्लाम की आलोचना करते हैं उससे इन इस्लामिक संगठनों और वामपंथियों को बहुत तकलीफ हो रही है

ऐसे ही आस्ट्रिया में भी एक कट्टर दक्षिणपंथी राष्ट्रवादी सरकार सत्ता में आई थी तब उस पार्टी के दो मंत्रियों को साजिशन तुर्की के रिसोर्ट में ले जाकर रशियन लड़की के साथ मौज करते वीडियो बनाकर इस्तीफा करवाया गया और आस्ट्रिया की सरकार गिर गई

भारत में भी जब से नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बने हैं तब से किसी न किसी मुद्दे पर दंगा भड़काने देश को जलाने की कोशिश की जा रही है

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भाग तीन
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ये वही देश अमेरिका है, जिसने विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र के मुख्य मंत्री नरेंद्र मोदी, जिन्हें देश की सभी अदालतों ने निर्दोष माना, उन को गुजरात हिंसा का दोषी मानते हुवे कई वर्षों तक वीज़ा नहीं दिया.

ये वही देश अमेरिका है जिसके राष्ट्रपति भारत में एक चर्च में चोरी हो जाने पर भारत वासियों पर असहिष्णुता का टैग लगा देते हैं.

ये वही देश अमेरिका है जहाँ के राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार भारत में 370 हटाए जाने का विरोध करते हैं, CAA को मुस्लिम विरोधी बताते हैं.

ये वही देश अमेरिका है जहाँ कि कम्पनी ट्विटर का मालिक सात समंदर पार भारत आकर ब्रह्मणिकल समाज के विरोध के पोस्टर लगाता है.

*अमेरिका की पूरी दुनिया के सामने पोल खुल रही है. ख़ुद के देश में अश्वेतों को द्वितीय श्रेणी का नागरिक बना कर रखा, ख़ुद के देश में मूल निवासी रेड इंडियन को ग़ुलाम बना कर रखा, ख़ुद के देश में गोरे पुरुषों को प्रथम श्रेणी का नागरिक बना कर रखा और चलते हैं दुनिया को बराबरी और अमेरिकन वैल्यू का ज्ञान पढ़ाने.
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🇮🇳🕉️जय माँ भारती🕉️🇮🇳

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